ग्वालियर

पता चला है कि बुधवार को ही कोर्ट से मृतक की रिहाई के आदेश आ गए थे। लेकिन समय ज्यादा होने कारण जेल प्रशासन ने उसके परिजनों को सुबह आने का कहकर लौटा दिया था। गुरुवार सुबह जब मृतक के परिजन जेल पहुंचे तो पता चला कि देर रात तबीयत बिगड़ने के चलते उसकी अस्पताल में मौत हो गई है। इस पर परिजनों ने जेल के बाहर हंगामा करना शुरू कर दिया और जेल प्रशासन पर हत्या का आरोप लगाया है।

मृतक की बहन पूजा का कहना है कि उसके भाई की कल 6:00 बजे रिहाई थी। मेरे साथ मेरा देवर और पुलिस वाला था। उनका भाई पिछले 7 साल से जेल में दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहा था। पुलिसकर्मी ने कहा कि वह मनोज की रिहाई का ऑर्डर लेकर आए हैं, उसे छोड़ दो। जेल वालों ने कहा कि देर ज्यादा हो गई है। कल सुबह आना तब मनोज को छोड़ देंगे। मैंने अपने भाई से मिलने या बात करने के लिए कहा, लेकिन ना तो मेरी बात कराई, ना ही मेरे भाई से मिलवाया। सुबह 7:00 बजे आने के लिए कहा। आज सुबह 6:00 बजे ही मैं जेल के बाहर आ गई थी। फिर जेल के पुलिस कर्मियों ने आवाज लगाकर बोला कि मनोज को लेने कौन आया है। मैंने कहा कि मैं आई हूं तो पुलिसकर्मियों ने कहा कि अभी वह नहा रहा है। कुछ देर वेट करो। तो हम इंतजार करने लगे। लेकिन 9:00 बजे फिर से पुलिसवाले ने हमें बुलाया तो मेरे देवर और पापा गए। उन्होंने कहा कि मनोज की मौत हो गई है। कल रात को तो मेरा भाई जिंदा था। आज अचानक उसकी मौत कैसे हो गई। मेरे भाई को जेल वालों ने हीं मारा है।
केन्द्रीय जेल अधीक्षक विदित सरवैया ने बताया कि दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे मनोज यादव की बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात को हालत बिगड़ी और उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां उसने दम तोड़ दिया। आरोपी को 7 साल पहले उत्तर प्रदेश पुलिस ने दुष्कर्म और पोस्को एक्ट के मामले में पकड़कर जेल पहुंचाया था। 4 फरवरी 2020 को उत्तर प्रदेश की जेल से ग्वालियर जेल में ट्रांसफर किया गया था। संभवत: उसे हार्ट अटैक आया और उसकी हालत बिगड़ी थी। पुलिस को सूचना दे दी है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।